KORBA 10 अगस्त को कृमि मुक्ति दिवस और 17 अगस्त को मॉपअप दिवस: जिले में 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को खिलाई जाएगी कृमिनाशक की दवा
10 अगस्त 2026 को (कृमि मुक्ति दिवस) तथा 17 अगस्त (माप अप दिवस) पर 1 से 19 वर्ष के बच्चों का खिलायी जाएगी कृमिनाशक दवा
भारत शासन के दिशा-निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी के नेतृत्व में जिले में प्रतिवर्ष 2 बार 6 माह के अंतराल में कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। दिनांक 10 अगस्त 2026 को जिले के ऑंगनबाड़ी केन्द्रों, शासकीय / शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं /केन्द्रीय वि़द्यालयों / नवोदय वि़द्यालयों / मदसरसों /निजी स्कूलों / महावि़द्यालयों /तकनीकि शिक्षा संस्थानों में 01 से 19 वर्ष के बच्चों , किशोरों/ किशोरियों को एलबेंडाजोल (कृमिनाशक) की दवा खिलायी जावेगी एवं जो बच्चे दवा खाने से छूट जाएंगे उन्हें 17 अगस्त 2026 को मॉपअप दिवस पर दवा का सेवन कराया जावेगा। जिससे कि बच्चों का स्वास्थ्य एवं पोषण का स्तर, एनीमिया की रोकथाम से बौद्धिक विकास तथा शाला में उपस्थिती में सुधार हो सके।
पेट के कीडे़ मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते है, यदि इसपर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह समस्या गंभीर परिणाम सामने ला सकती है । पेट के कीड़े यानि कृमि के नियंत्रण को ध्यान दिलाने के लिए राष्ट्रीय कृमिमुक्ति दिवस मनाया जाता है। पेट में पाये जाने वाले कीडे़ जैसे राउंडवर्म, विहपवर्म तथा हुकवर्म शरीर पर गंभीर समस्या पैदा कर सकते है । इसलिए इन्हें शरीर से दूर करना (कृमि मुक्ति) बहुत जरूरी हो जाता है। कृमि मुक्ति को हम डिवार्मिग कहते है।
यह वर्म यानि कीड़े परजीवी होते है जो भोजन और अस्तित्व के लिए मानव ऑंतों में रहते है कीडे़ मानव शरीर के पोषक तत्वों का उपभोग करते हैं और लोगों में विषेषकर बच्चों में रक्त हानि खराब पोषण का कारण बनते हैं मुख्य रूप से इन कीड़ों का संक्रमण खराब स्वच्छता की स्थिती के परिणाम स्वरूप होता है और संक्रमित मिट्टी के संपर्क से प्रवेश करता हैं।
देश / जिले में कृमि संक्रमण बहुत अधिक है खासकर बच्चों में यह कृमि पाए जाते हैं, पेट में कृमि होने की वजह से बच्चों में खून की कमी हो जाती है विशेषकर लड़कियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस एन केशरी ने बताया कि जिले में 10 अगस्त कृमि मुक्ति दिवस एवं 17 अगस्त को मॉपअप दिवस पर कुल 1 से 19 वर्ष के बच्चों तथा किशोर एवं किशोरियों को एलबेंडाजोल की दवा खिलायी जावेगी । इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, तकनीकि शिक्षा विभाग, , पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से किया जावेगा एलबेंडाजोल की गोली 01 वर्ष से 02 वर्ष तक में बच्चों को आधी गोली चूरा /पीसकर पानी के साथ चम्मच से पिलाया जाना है, 02 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को पूरी एक गोली चूरा /पीसकर पानी के साथ सेवन कराया जाना है तथा 03 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी एक गोली चबाकर पानी के साथ खिलाया जावेगा।
उन्होने बताया कि कृमिनाशक दवा (एलबेंडाजोल) किशोर एवं किशोरियों के लिए सुरक्षित है बच्चों के शरीर में कृमि के कारण कुछ मामूली/ हल्के / सामान्य प्रतिकूल प्रभाव जैसे जी मितलाना, उल्टी-दस्त, पेट में हल्का दर्द और थकान अनुभव होने की संभावना हो सकती है। जिसे स्कूल तथा ऑंगनबाड़ी केन्द्रों में ही देख-भाल करते हुए आसानी से ठीक किया जा सकता है इन परिस्थितयों में बच्चे को खुली छायादार जगह में लिटाकर आराम कराए तथा पानी पिलावें, अगर कोई बच्चा पहले से बीमार है तो इस स्थिती में एलबेंडाजोल की गोली ना दें।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर एस.एन. केशरी ने जिले के नागरिको और जनप्रतिनिधियों से अपील किया है कि वे अपने तथा अपने क्षेत्र के 01 से 19 वर्ष तक के बच्चों (बालक / बालिकाओं) को कृमिमुक्ति दिवस ( अगस्त) पर स्कूल / कॉलेज तथा ऑंगनबाड़ी केन्द्रों में 10 अगस्त को खिलाई जा रही एलबेंडाजोल की दवा तथा छूटे हुए बच्चों को 17 अगस्त मॉप अप दिवस पर अवश्य खिलायें । एलबेंडाजोल की दवा बच्चों में एनिमिया को कम और पोषण में सुधार , ग्रोथ और वजन बढ़ना , मानसिक एवं शारीरिक विकास में सुधार , बच्चों को सक्रीय और क्षमता में सुधार तथा अन्य सक्रमणों के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।



