माँ सर्वमंगला देवी का दिव्य दरबार मनोकामना ज्योति कलशों से जगमग

कोरबा । चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2083, 19 मार्च 2026 को नवरात्रि के प्रथम दिन माँ सर्वमंगला देवी मंदिर में 9 दिन तक चलने वाला आध्यात्मिक महापर्व नवरात्रि घट स्थापना के साथ प्रारंभ हो गया। शुभ नक्षत्र में माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक/पुजारी एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महाराज) ने सपत्नीक विद्वान आचार्यों एवं पंडितों, बैगाओं की उपस्थिति में परिसर में स्थित कलश कक्षों में स्थापित मनोकामना ज्योति कलशों को दिव्य मंत्रोच्चार के साथ प्रज्ज्वलित किया। मनोकामना ज्योति कलशों से परिसर दमक उठा।
8000 तैल्य कलश एवं 750 घृत कलशों से दैदिव्यमान हुआ परिसर
प्रबंधक नमन पाण्डेय ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन 8000 तैल्य ज्योति कलशों को प्रज्ज्वलित किया गया, वहीं 750 घृत कलश जलाए गए। 8750 ज्योति कलशों के दिव्य प्रकाश पूंज से परिसर दमक उठा। श्री पाण्डेय ने बताया कि ज्योति कलशों के प्रकाश पूंज से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ज्योति कलशों के दर्शन से मन में पवित्रता का भाव जागृत होता है। कोरबा, छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों एवं विदेशों से भी श्रद्धालु मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराए हैं।
प्रथम दिन अभूतपूर्व भीड़
नवरात्रि प्रारंभ होते ही शक्ति की उपासना में लोग डूब जाते हैं। प्रथम दिन माँ शैलपुत्री स्वरूपा माँ सर्वमंगला देवी का दर्शन करने परिसर में अभुतपूर्व भीड़ देखी गई। परिसर से सड़क तक श्रद्धालुओं की लंबी लाईन लगी हुई थी और श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। परिसर में प्रबंधन द्वारा भोग प्रसाद की व्यवस्था रखी गई है और श्रद्धालु यहां तृप्त भी हो रहे हैं।
संध्या महाआरती
मन पर विजय प्राप्ति का महापर्व है नवरात्रि- नन्हा महराज

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक/पुजारी एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महाराज)
सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक एवं पुजारी नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने सभी प्रदेशवासियों को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2083 हिन्दू नववर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए सभी की मंगलकामनाओं का शुभ संदेश दिया है और बताया कि माँ आदिशक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्रि मुख्यरूप से मन पर विजय प्राप्ति का महापर्व है।
माँ सर्वमंगला की असीम कृपा हम पर बरसती रहे और कोरबा सुख समृद्धि के साथ विकास का नया आयाम गढ़े और क्षेत्रवासी खुशहाल बनें। उन्होंने कहा कि आदिशक्ति की उपासना एवं विधि विधान से की गई पूजा से घर में सुख समृद्धि का वास होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने बताया कि यह पर्व नारी के सम्मान का महापर्व है, यह पर्व मन में विजय प्राप्ति का महान पर्व है। आत्म संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण के लिए उपासना प्रभावी साधन है और माँ के दर्शन मात्र से ही मन को असीम शांति मिलती है। घर का कलह दूर होता है और सुख समृद्धि का वास होता है। मंदिरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराने के साथ नवरात्रि में घर-घर भी ज्योत जलना चाहिए, इससे घर में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है और चारों तरफ खुशहाली आती है।
