शासकीय सेवकों एवं उन पर आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार हेतु शासनादेश
कोरबा।राज्य शासन द्वारा प्रदेश में शासकीय सेवकों एवं उन पर आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार हेतु राज्यांतर्गत एवं राज्य के बाहर विभिन्न निजी चिकित्सालयों को प्रति वर्ष मान्यता प्रदान की जाती है। इस वर्ष भी छ.ग.शासन चिकित्सा षिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर अटलगनर के पत्र क्र./GENS-1902/79/2026MED-328290 नवा रायपुर अटलनगर दिनांक 13.05.2026 द्वारा राज्यांतर्गत 86 एवं राज्य के बाहर 66 निजी चिकित्सालयों को दिनांक 01.04.2026 से 31.03.2027 तक की अवधि के लिए शासकीय सेवकों एवं उन पर आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार हेतु मान्यता प्रदान की गई है।
जिले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केषरी द्वारा जानकारी दी गई कि जिले के अधिनस्थ शासकीय विभागों में कार्यरत शासकीय कर्मियों द्वारा अपनी सुविधानुसार समीपस्थ मान्यता /गैर मान्यता प्राप्त संस्था में स्वयं अथवा अपने आश्रितों का उपचार कराया जाता है। प्रायः देखा जा रहा है कि विभिन्न विभागों के कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर अपने या आश्रित परिवार के उपचार मे हुए व्यय की प्रतिपूर्ति हेतु चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक कार्या. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में अपने नियंत्रण अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत किये जाते है। इन देयको का अवलोकन करने पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति आवेदन में जानकारी के अभाव में विभिन्न कमियां आवष्यक दस्तावेज नही रहने पर संबंधित कार्यालय को वापस किया जाता हैै,जिससे उनके प्रकरण के निराकरण में अनावष्यक विलंब होता है।
डॉ.केषरी द्वारा जिले के सभी कार्यालय प्रमुख सहित शासकीय अधिकारी/कर्मचारियों को जानकारी देते हुए बताया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयको के सम्यक निराकरण के संबंध में चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के तहत प्रमुख रूप से निम्नांकित दस्तावेज संलग्न करने के साथ ही शासन के मापदंड का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना हैः-
- चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक प्रतिहस्ताक्षर/द्वितीय अभिमत हेतु संबंधित कार्यालय/विभाग के कव्हरिंग पत्र के माध्यम से प्रेषित किये जावे।
- चिकित्सा प्रतिपूर्ति फार्म (पूर्ण जानकारी सहित) चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 13 (1) अनुसार निर्धारित प्रपत्र प्रारूप 01 एवं 02 में प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। प्रारूप www.cgdme.com.in से डाउनलोड किया जा सकता है।
- राज्यांतर्गत प्रकरणों में मान्यता प्राप्त अस्पतालों में शासकीय सेवकों एवं उनके परिवार के आश्रित सदस्यों के उपचार कराये जाने हेतु जिले के सक्षम जिला चिकित्सालय प्रमुख की अनुषंसा अनिवार्य होगी।
- आकस्मिक परिस्थिति की दषा में छ.ग. सिविल सेवा चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 10 (7) अनुसार आवेदक/परिवार के सदस्य द्वारा उपचार उपरांत मुख्यालय लौटने के 07 दिवस के भीतर अपने नियंत्रण अधिकारी/कार्यालय प्रमुख को सूचित किया जाना आवष्यक होगा तथा नियमानुसार कार्योत्तर स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
- राज्य के बाहर स्थित मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालयों में उपचार कराने हेतु मरीजों को प्रथमतः चिकित्सा महाविद्यालय के रेफरल कमेटी का रिफरल प्रमाण पत्र तथा चिकित्सा महाविद्यालय में संबंधित रोगों की जांच/उपचार/विष विषेषज्ञों की सुविधा उपलब्ध न होने पर यथास्थिति संयुक्त संचालक सह अधीक्षक/उप संचालक ,षासकीय/मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सा संस्थाओं मे रिफर कर सकेगें।
- चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 10 (4) अनुसार स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थाएं तथा पब्लिक-प्रायवेट-पार्टनरषीप (पीपीपी)नीति के अंतर्गत संचालित संस्थाएं शासकीय सेवकों के उपचार हेतु मान्यता प्राप्त समझी जावेगी। उक्त संस्थाओं में उपचार हेतु रिफरल की आवष्यकता नही होगी।
- चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 13 (1) अनुसार चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन निर्धारित प्रारूप 04 पेज का पूर्ण जानकारी सहित व्यय किये जाने की तारीख के छः माह की अवधि के भीतर नियंत्रण अधिकारी को प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।
- प्रत्येक आवेदन पत्र के साथ प्राधिकृत चिकित्सा परिचारक द्वारा सम्यक रूप से हस्ताक्षरित प्रारूप 02 में आवष्यक प्रमाणपत्र तथा उसके द्वारा सम्यक रूप् से प्रतिहस्ताक्षरित किये गये नगद पत्रक (कैष मेमो) रसीदें,जो उपचार और कमरे किराये के व्यय के भुगतान से संबधित है प्रस्तुत किया जाना है।
- चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 15 के अनुसार कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति की मांग का निराकरण संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डी.डी.ओ.) द्वारा किया जावेगा। नियंत्रण प्राधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह चिकित्सा व्यय से संबंधित मांगो पर हस्ताक्षर या प्रतिहस्ताक्षर करने के पूर्व,उसका इस प्रकार सावधानीपूर्वक परीक्षण कर लें कि मांग वास्तविक है और नियमों के अनुसार है और दावा किये गये व्ययों के समर्थन में आवष्यक नगदी पत्रक (कैष मेमो),रसीदे,प्रमाण पत्र संलग्न किये गये है नियंत्रण प्रधिकारी ऐसे दावों को अस्वीकृत कर सकेगा,जो नियमों के अनुसार न हो।
- परिवार के आश्रित सदस्यों हेतु आश्रित प्रमाण पत्र (षपथ पत्र)10 रूपये के स्टाम्प पेपर पर नोटराईज्ड कराकर सत्यापित/अभिप्रमाणित छायाप्रति संलग्न किया जाना है।
- उपचारित अस्पताल का डिस्चार्ज समरी प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है।
- यदि शासकीय सेवक की मृत्यु हो चुकी है तो डिस्चार्ज समरी के सथान पर अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र संलग्न किया जाना आवष्यक है।
- अस्पताल का बिल,स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी समस्त जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रति संलग्न किया जाना है।
- एैसे कर्मचारी जो राज्य शासन द्वारा यथाविहित चिकित्सा भत्ता प्राप्त कर रहे है,वे इन नियमों के अंतर्गत बाह्य रोगी की दषा में उपगत चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति के हकदार नही होगें।
- शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालो को प्रदेष के शासकीय सेवकों एवं उनके परिवार के सदस्यों की उपचार दर सी.जी.एच.एस.योजना के अंतर्गत केन्द्र शासन के कर्मचारियों हेतु लागू उपचार की दरों पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने के स्पष्ट निर्देष है। इस हेतु शासकीय सेवकों को अपनी पहचान हेतु संबंधित चिकित्सालय में अपना एम्पलाई आईडी दिया जाना होगा। यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान द्वारा उक्त निर्देष का पालन नही किया जाता है कि तो जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अथवा राज्य स्तर के सक्षम अधिकारी को षिकायत कर सकते है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन. केषरी द्वारा जिले के सभी शासकीय विभाग के अधिकारी/कर्मचारी से आग्रह किया गया है कि वे स्वयं या अपने आश्रित परिवार के सदस्यों की उपचार कराने पर उल्लेखित बिन्दुओं का अनुसरण करना सुनिष्चित करेगें,जिससे उनके चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकरण के निराकरण में अनावष्यक रूप से विलंब न हो।
