अंधेरों में भी रोशनी खोजती शिवांगी, हौसलों की वो उड़ान जो कई जिंदगियाँ रोशन करेगी
कलेक्टर ने कम्प्यूटर सेट देकर दृष्टिबाधित शिवांगी का हौसला बढ़ाया
कोरबा 26मई 2026/
जिले के गेवरा बस्ती की दृष्टिबाधित दिव्यांग शिवांगी आज उन सभी लोगों के लिए मिसाल बन चुकी है जो जीवन की कठिनाइयों के सामने हार मान लेते हैं। बचपन में खिलखिलाती शिवांगी को क्या पता था कि बढ़ती उम्र के साथ उसकी आँखों की रोशनी धीरे-धीरे हमेशा के लिए धुंधली होती जाएगी। मासूम उम्र में शुरू हुआ यह संघर्ष समय के साथ पहाड़ सा बन गया, लेकिन शिवांगी का हौसला कभी नहीं टूटा।
शिवांगी ने बाकी बच्चों की तरह स्कूल जाना शुरू किया था, पर कुछ वर्षों बाद उसे महसूस होने लगा कि दृश्यों की दुनिया उससे दूर जा रही है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे माता-पिता उसे लेकर जगह-जगह अस्पतालों में गए, दिल्ली तक ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने साफ शब्दों में कह दिया कि रेटिना की समस्या के कारण धीरे-धीरे दृष्टि पूरी तरह चली जाएगी। और एक दिन ऐसा भी आया जब कक्षा दसवीं में पहुंचते-पहुंचते उसकी आँखों की रोशनी पूरी तरह बुझ गई।
सपने केवल उसके नहीं टूटे, बल्कि उसके माता-पिता के भी बिखर गए। दसवीं की परीक्षा उसने सहयोगी लेखक की मदद से पास की, लेकिन आगे का रास्ता और कठिन होता जा रहा था। वह आगे बढ़ना चाहती थी, अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी, पर परिवार की आर्थिक परिस्थितियाँ उसके हर सपने पर विराम लगा देती थीं। फिर भी शिवांगी ने हार नहीं मानी। उसने रायपुर जाकर कंप्यूटर प्रशिक्षण लिया, जहाँ उसने एमएस ऑफिस, पॉवर पॉइंट, एक्सेल जैसी तकनीकें सीखी और एनबीडीए सॉफ्टवेयर के माध्यम से कमांड सुनकर कंप्यूटर चलाने की कला भी सीखी। अंधेरा था, पर उसके भीतर का उजाला उससे कहीं अधिक चमक रहा था।
अपनी संघर्ष-कथा और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को लेकर जब शिवांगी जनदर्शन में कलेक्टर कुणाल दुदावत के पास पहुंची, तो उसने स्वरोजगार के लिए एक कंप्यूटर की मांग रखी। कलेक्टर दुदावत ने उसकी लगन, संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा को देखकर न केवल उसकी बात सुनी बल्कि उसे पूरा करने का आश्वासन भी दिया। यह आश्वासन जल्द ही हकीकत में बदल गया और शिवांगी को कंप्यूटर सेट प्रदान किया गया।
आज शिवांगी के लिए यह कंप्यूटर केवल मशीन नहीं, बल्कि नई जिंदगी की नई शुरुआत है। यह उसके अंधेरे में बुझी उम्मीदों को फिर से जगाने वाला दीपक है। वह अब प्रिंटिंग से संबंधित काम शुरू करके आत्मनिर्भर बनने की तैयारी में है। उसकी माँ राजेश्वरी सारथी, जो वर्षों से बेटी और बेटे की बीमारी को लेकर चिंतित रहती थीं, आज आश्वस्त हैं कि उनकी बेटी अब अपने पैरों पर खड़े होने की राह पर है। उनका कहना है कि कलेक्टर ने उनकी फरियाद सुनी और उनकी बेटी को नई दिशा दी, जिसके लिए वे आभारी हैं। शिवांगी खुद कहती है कि कंप्यूटर पाकर वह बेहद खुश है और इससे वह अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेगी।
शिवांगी की कहानी हमें सिखाती है कि इंसान की आंखें भले न देख पाएं, पर उसका हौसला कभी अंधा नहीं होता। उसका साहस, उसकी ललक और सीखने की उसकी जिद हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है जो किसी कठिनाई के कारण अपने सपनों से दूर हो जाता है। शिवांगी ने साबित किया है कि अंधेरा बाहर हो सकता है, भीतर नहीं, और जब भीतर उजाला हो तो रास्ते खुद-ब-खुद रोशन होते जाते हैं। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी श्री हरीश सक्सेना और मुकेश दिवाकर भी उपस्थित रहे।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
What's Hot
KORßA:-अंधेरों में भी रोशनी खोजती शिवांगी, हौसलों की वो उड़ान जो कई जिंदगियाँ रोशन करेगी….कलेक्टर ने कम्प्यूटर सेट देकर दृष्टिबाधित शिवांगी का हौसला बढ़ाया
Related Posts
About Us

Rameshwar Thakur
Owner & Editor
Disclaimer
श्री गणेशाय: नमः
छत्तीसगढ़ की खबरें प्राथमिकता से प्रकाशित की जाती हैं, जिसमें जनहित की सूचनाएं, समसामयिक घटनाओं पर आधारित खबरें प्रकाशित की जाती हैं। साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री (समाचार / फोटो / वीडियो आदि) शामिल होगी।
SHIKHARKESRI.COM इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। साइट में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, इसके लिए SHIKHARKESRI.COM या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी ज़िम्मेदारी नहीं होगी।
Important Links
© 2025 Shikharkeshri.com | All Rights Reserved | Develop By Nimble Technology.


