एसईसीएल दीपका माइंस की सीमा में अनाधिकृत लोगों का प्रवेश रोकने माइंस की सीमा पर फेंसिंग लगा की जा रही घेराबंदी
- खदान की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने जताई जा रही उम्मीद
- 300 मीटर से भी कम दूरी पर है ग्राम
कोरबा । सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना में अनाधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने हेतु एसईसीएल दीपका माइंस की सीमा को फेंसिंग से घेराबंदी करने बाड़ लगाई जा रही है। कार्य पूरा होने के बाद कोयला खदान की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही हैं। कोल माइंस से 300 मीटर से भी कम दूरी पर ग्राम बसा हुआ है। अभी तक माइंस की सीमा पर सुरक्षा के जान जोखिम में डाल कोयला चोरी करने अवैध तरीके से खुदाई में मलबा गिरने की घटना हो चुकी है। इसमें दबकर अवैध खनन कार्य में संलिप्त ग्रामीणों की मृत्यु भी हुई थी।
माइंस विस्तार से दीपका खदान से अब ग्राम हरदीबाजार की आबादी क्षेत्र से 300 मीटर से भी कम दूरी पर खनन कार्य किया जा रहा है। कोयला निकालने एसईसीएल में भारी-भरकम मशीनों का उपयोग करने के साथ ब्लास्टिंग भी की जाती है। इस कारण अनाधिकृत लोगों का प्रवेश न हो और खदान की सुरक्षा के लिहाज से एसईसीएल दीपका प्रबंधन फेंसिंग से घेराबंदी करने में जुटा हुआ है।
दीपका माइंस की सीमा पर इस तरह की गई घेराबंदी।
दीपका खदान की सीमा पर सुरक्षा घेरा नहीं होने और आबादी क्षेत्र नजदीक होने से निदेशक खान सुरक्षा बिलासपुर ने जांच के बाद एसईसीएल दीपका खदान के 1 ए ओसी माइंस से ओवरबर्डन की मिट्टी की निकासी कर रहे ठेका कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। सुरक्षा का ध्यान नहीं रखने पर खनन पर रोक लगाने की चेतावनी भी दी थी। आबादी क्षेत्र से 45 मीटर की दूरी पर ही ओवरबर्डन खुदाई का नियम है, ऐसे में माइंस की सीमा पर सुरक्षा घेरा मजबूत हो, यह जरूरी हो जाता है।
जेसीसी की बैठक में भी खदान की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था और सीमा पर बाड़ लगाकर फेंसिंग से घेराबंदी की मांग यूनियन नेताओं की ओर से उठाई थी। खदान की सीमा पर फेंसिंग कराकर सुरक्षा को मजबूत बनाने दीपका प्रबंधन ने ध्यान दिया है। विस्थापन में देरी हुई है। हालांकि इसकी एक वजह मुआवजे में विसंगतियां व अन्य कारण से भी ग्रामीणों ने ग्राम नहीं छोड़ा है। दूसरी ओर खुली खदान से कोयले के ऊपर मिट्टी की परत को हटाने के बाद 80 से 100 फीट नीचे हैवी मशीनों से खनन कार्य किया जा रहा है। ऐसे में मजबूत सुरक्षा घेरा जरूरी हो गया था। इस ओर दीपका प्रबंधन ने गंभीरता से ध्यान दिया है। फेंसिंग से घेराबंदी करने माइंस की सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू हो गया है।
