

किसानों का कोई रकबा ना काटें, एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता खत्म करें
दोषी अधिकारियों पर हो कार्यवाही, 31 जनवरी को होगा उग्र प्रदर्शन
0 आम आदमी पार्टी की प्रेसवार्ता
कोरबा। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि किसानों का कोई रकबा ना काटा जाए और एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता को भी खत्म किया जाए। सरकार की गलती की वजह जिन किसानों का रकबा कटा है, उनको जितना रकबा कटा है उस हिसाब से उनकी फसल का जितना मूल्य होता है उतना मुआवजा दिया जाए।
कोरबा प्रेस क्लब तिलक भवन में प्रेस वार्ता आयोजित कर आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल व अभिषेक मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष ने प्रदेश में धान खरीदी अव्यवस्था पर सवाल उठाए। उत्तम जायसवाल ने कोरबा जिले के अंतर्गत आने वाले झांझ गांव के बैसाखू राम मरकाम के घर जाकर उनके तबियत का हॉल जाना उन्होंने कहा कि किसानों का रकबा सुधार के लिए तहसील ऑफिस के कई बार चक्कर काटे है ये सरकार किसानों का जानबूझकर रकबा काट रही है एग्ग्रीस्टेक पंजीयन जैसी समस्याओं पर आम आदमी पार्टी ने धान खरीद शुरू होने से पहले से ही लगातार सरकार को चेताया था लेकिन इस डबल इंजन की सरकार के ना मंत्री ना अफसर किसी के भी कानों में जूं तक नहीं रेंगा, ये अपने अहंकार में अपनी गलती को ना मानने को तैयार हैं और ना सुधारने को तैयार हैं, भले ही किसानों को इनकी गलती का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़े। इससे पहले भी किसानों ने प्रशासनिक कारणों के चलते आत्महत्या की है लेकिन ये पहला मामला है जब किसी किसान ने धान खरीद की अव्यवस्था को लेकर अब तक प्रदेश में 3 किसानों ने आत्महत्या करने का प्रयास किया है। ये सीधा सीधा इनकी धान खरीद पर लाई नई पॉलिसी की नाकामी और अपने धान खरीदी के 21 क्विंटल के वादे से बचने के लिए बीमा कंपनियों जैसे प्रलोभन देने के बाद नीचे नियम और शर्ते *लागू जैसे रास्ते अपना रही है, इनका उद्देश्य कैसे भी करके चाहे रकबा काटके चाहे एग्रेस्टेक में पंजीयन के बहाने से रकबा काट कर किसान की धान खरीदी कम करना है। जब ताकत नहीं थी तो एक एक दाना लेंगे ये वादा क्यों किया? अब जब वादा निभाने का समय आया है तो दुनिया भरके अड़ंगे लगाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है।
अभिषेक मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में भी इन्होंने ऐसे ही स्वामीनाथन की सिफारिशे लागू करने का वादा करके किसानों को ठगा। अब छत्तीसगढ़ राज्य में भी वही काम कर रहें हैं। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ये मांग करती है है किसानों का कोई रकबा ना काटा जाए और एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता को भी खत्म किया जाए व सरकार की गलती की वजह जिन किसानों का रकबा कटा हैं उनको जितना रकबा कटा है उस हिसाब से उनकी फसल का जितना मूल्य होता है उतना मुआवजा दिया जाए व अस्पताल में भर्ती किसानों को अच्छे प्राईवेट अस्पताल में पूरा इलाज कराया जाए जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाए। अन्यथा आम आदमी पार्टी प्रदेश के किसानों के साथ हो रहे अन्याय पर किसानों के साथ मिलकर सड़क पर प्रदर्शन करेगी। वही इस अवसर पर लोकसभा सचिव चांपा जांजगीर राजेश पुरी गोस्वामी, जिला महासचिव विनय गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री जगलाल राठिया, लोकसभा महासचिव शत्रुघन साहू, लोकसभा उपाध्यक्ष भूषण कुर्रे, कोरबा जिलाध्यक्ष रिचर्ड डेविड लोगन, यूथ विंग जिलाध्यक्ष आजाद बक्श, विजय नायक, लहना सिंह, लता सिंह, धरम दास गुप्ता, सोमराज, कमलेश सिंह राज, सत्येन्द्र यादव आदि उपस्थित थे ।
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आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के साथ कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में प्रेस वार्ता लेकर छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कोरबा जिले के तहसील हरदीबाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम झांझ के पीड़ित किसान बैसाखू राम मरकाम के घर मिलने गए थे तो उन्हें पता चला कि उन्हें बिलासपुर सिम्स रेफर किया गया है। श्री जायसवाल ने कहा किसान बैसाखूराम कभी नशा नहीं करते थे। जबकि बैसाखू राम बजरंगबली का भक्त है। वहीं उन्होंने कहा प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी होने का दावा करते हैं, लेकिन आदिवासियों की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। वही आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा किसान का जमीन तीन एकड़ है, लेकिन 50 डिसमिल का ही धान बेच की नौबत आई थी, तो किसान अपने आपा खो बैठा और जहर खुरानी जैसे कदम उठाने को मजबूर हुआ। जबकि किसान बैसाखू राम की आर्थिक स्थिति अत्यंत ही खराब है। प्रदेश में सरकार की नाकामी के चलते प्रशासनिक अधिकारी भी मजबूर हो गए हैं। शासन व प्रशासन से हम मांग करते हैं कि पीड़ित बैसाखू राम मरकाम का ईलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में अच्छे से इलाज प्रशासन की देखरेख में हो। और पीड़ित किसान के पूरे तीन एकड़ का धान खरीदी किया जाए। दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई भी की जाए। अगर शासन और प्रशासन हमारी बात को नहीं मानी तो 31 जनवरी 2026 उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य रहेंगे। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार व जिला प्रशासन की होगी।
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