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KORBA:- सरपंच सचिव ने डकारी नाला निर्माण की राशि, होगी वसूली….जिल्गा नाला में 10 लाख की लागत से पुलिया निर्माण की मिली थी स्वीकृति, पहली किश्त 4 लाख को डकारा
सरपंच सचिव ने डकारी नाला निर्माण की राशि, होगी वसूली
0 जिल्गा नाला में 10 लाख की लागत से पुलिया निर्माण की मिली थी स्वीकृति, पहली किश्त 4 लाख को डकारा√
कोरबा। शासन प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए भारी भरकम राशि जारी की जा रही है। जिले में सरपंच सचिव की जुगलबंदी से शासकीय राशि को डकारा जा रहा है। कई मामलों में सरपंच सचिव से रिकवरी भी की जा रही है। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है। जिसमें सरपंच सचिव ने नाला में पुलिया निर्माण की पहली किश्त 4 लाख रुपए बिना काम कराए आहरण कर लिए। अब सरपंच सचिव से इस रकम की रिकवरी की तैयारी कर ली गई है। इस संबंध में जनपद पंचायत कोरबा सीईओ ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोरबा को वसूली के लिए प्रकरण प्रेषित किया है।
जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत जिल्गा के जुनवानी नाला में पुलिया निर्माण कार्य की कलेक्टर जिला खनिज संस्थान’ न्यास कोरबा के आदेश दिनांक 14/09/2018 के तहत् प्रशासकीय स्वीकृति रूपये 10लाख (दस लाख रुपए) की जारी की गई थी। जिसमें 4 लाख (चार लाख रूपये ) की प्रथम किश्त जारी की गई थी। जिसके अनुक्रम में कार्यालयीन पत्र कमांक 1358 दिनॉक 22.09.2018 सरपंच / सचिव ग्राम पंचायत जिल्गा को कार्य करने आदेश जारी किया गया था। सचिव ग्राम पंचायत जिल्गा की मांग के आधार पर प्रथम किश्त की राशि 4 लाख ग्राम पंचायत जिल्गा को जारी किया गया था। ले-आउट 30.09.2018 को दिया गया था, सरपंच/सचिव द्वारा कार्य को प्रारंभ नहीं किये जाने के फलस्वरूप 02.03.2020, 03.04.2021 एवं पत्र क्रमांक 359 दिनोंक 27. 05.2021 के तहत् स्मरण कराया गया, किन्तु कार्य प्रारंभ नहीं किया गया। जिसे लेकर तत्कालीन सरपंच अंगोबाई और सचिव मोतीराम निषाद सचिव ग्राम पंचायत काटकोना के वेतन से वसूली राशि 2- 2 लाख वसूली के लिए प्रकरण को प्रेषित किया गया है।
अन मोतीराम निषाद सचिव ग्राम पंचायत काटकोना के वेतन से वसूली राशि का 1/2 भाग की राशि 200/लाख (दो लाख रूपये मात्र) वसूली की कार्यवाही हेतु प्रकरण
बॉक्स
चले जाते हैं न्यायलय की शरण में
कई ग्राम पंचायत में वसूली के प्रकरण सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में कई सरपंच सचिव न्यायालय की शरण में चले जाते हैं। मामले में स्टे मिल जाता है। इसके बाद वसूली की प्रक्रिया बस्ते में चली जाती है। साथ ही जो विकास कार्य होने चाहिए वह शुरू नहीं हो पाते हैं। जिससे ग्रामीण अंचलों में कई विकास कार्य प्रभावित पड़े हुए हैं।
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