विधायक फूलसिंह राठिया ने कोरबा कलेक्टर को पत्र लिखकर



कोरबा: अदानी विस्थापन का ज्वालामुखी फिर सक्रिय, वादाखिलाफी पर विधायक की सीधी चेतावनी
”कोरबा। कोरबा जिले में भू-विस्थापितों का मुद्दा एक बार फिर सुलग उठा है और अब यह सियासी गर्मी में बदलता नजर आ रहा है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक फूलसिंह राठिया ने कोरबा कलेक्टर को कड़ा पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि यदि वादों को पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन अपरिहार्य होगा।विधायक फूल सिंह राठिया ने अपने पत्र में कोरबा पावर लिमिटेड (अदानी) पताढ़ी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 में जब किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, तब प्रत्येक खातेदार को नौकरी देने का वादा किया गया था। 24 अप्रैल 2026 को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोरबा के कार्यालय में जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति (डी.आर.आर.सी.) की बैठक रखा गया था जिनमें के.पी.एल अदानी कंपनी के अधिकारी और जिला प्रशासन मिलकर एक परिवार को केवल एक नौकरी देने की बात कर रहे हैं, जिससे प्रभावित ग्राम पंचायत खोड्डल, पताढी़, पहंदा, सरगबुंदिया, कुदुरमाल एवं ढनढनी गांव के परिवारों में भारी आक्रोश है एवं वहां के प्रभावित ग्रामीण अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है।पुराने समझौते भी अधूरे, भरोसा टूटामामला यहीं नहीं रुकता। वर्ष 2004-05 में हुए त्रिपक्षीय समझौते में 330 लोगों को स्थायी रोजगार देने की बात कही गई थी। लेकिन हकीकत यह है कि कई पात्र लोग आज भी वर्षों से नौकरी की राह देख रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन और कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।नई मांगों ने बढ़ाया दबावअब ग्रामीणों ने अपनी मांगों का दायरा बढ़ा दिया है। जिनकी जमीन अधिग्रहण में नहीं गई या जो भूमिहीन हैं, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग जोर पकड़ रही है। इससे साफ है कि विस्थापन का मुद्दा अब व्यापक सामाजिक असंतोष में बदलता जा रहा है।न नौकरी, न भत्ता—नियमों की अनदेखीइकाई 3, 4, 5 और 6 के लिए जमीन लेने के बावजूद प्रभावितों को न नौकरी दी गई और न ही भत्ता। जबकि नियमानुसार यदि 3 वर्ष 6 माह के भीतर रोजगार नहीं दिया जाता, तो कंपनी को भत्ता देना अनिवार्य होता है। यहां दोनों ही व्यवस्थाएं ठप हैं।आंदोलन की चेतावनी से बढ़ी हलचल विधायक फूलसिंह राठिया ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रत्येक खातेदार को स्थायी नौकरी नहीं दी गई, तो वे जन प्रतिनिधियों, यूनियनों और ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे। इस पत्र के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

यूनियन अध्यक्ष प्रवीण ओगरे बोले—“कंपनी कर रही है धोखा”
यूनियन का आरोप—‘धोखा और खिलवाड़’भू-स्थापित मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रवीण ओगरे ने चर्चा के दौरान कंपनी पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि कंपनी ने क्षेत्रवासियों के साथ वादाखिलाफी कर धोखा किया है और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।कोरबा में भू-विस्थापितों का मुद्दा अब केवल मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह असंतोष और संघर्ष का रूप ले चुका है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है, जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं
