
KORßA:-चैत्र नवरात्रि में डंगनाई देवी पहाड़ों वाली माता आदिशक्ति के दरबार में श्रद्धालु के दौरान अपार आस्था और श्रद्धालुओं की भारी भीड़….दुर्गम पहाड़ी और अधूरी बनी है सीढ़ी
जिले के ग्रामीण अंचलों के पहाड़ी क्षेत्रों में आस्था के ऐसे दीप जल रहे हैं जिसके पीछे ग्रामीणों की अपनी अपनी मान्यताएं हैं। ऐसी ही मान्यता वाले एक डंगनाई पहाड़ है। करतला विकासखंड ग्राम पंचयत नोनबिर्रा में डंगनाई पहाड़ पर विराजित मां डंगनाई देवी की आसपास क्षेत्र
डंगनाई पहाड़ रहस्यमय का सपना: यह मान्यता है कि वर्षों पहले एक ग्रामीण (स्थानीय आदिवासी) को माँ काली ने दर्शन सपने दिए और स्वयं की मूर्ति के डंगनाई पहाड़ के ऊपर होने का संकेत दिया।
डंगनाई पहाड़ के ऊपर, में उद्गम से पहाड़ में काली माता मूर्ति से होने का संकेत दिया।डंगनाई पहाड़ रहस्यमय का सपना

डंगनाई पहाड़ पर स्थित महाबली बजरंगबली की मूर्ति में सिक्का चिपकने की मान्यता का संदर्भ डंगनाई पहाड़, जहाँ हनुमान जी की प्रतिमा पर सिक्का चिपकाने से मन्नत पूरी होने की बात कही जाती है। ग्रामीणों क द्वारा


माता के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु। लेकिन दुर्गम पहाड़ी और अधूरी बनी है सीढ़ी देखें
डंगनाई देवी पहाड़ के दुर्गम पहाड़ी रास्ते को सुगम बनाने के लिए 46 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे इस राशि से मंदिर स्थल तक सीढ़ी बनाने का काम करना था जो आधा अधूरा बना हुआ है। डंगनाई देवी दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं जैसे धरमजयगढ़ , हाटी और खरसिया रायगढ़ कोरबा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी दर्शनार्थी यहां पहुंचते हैं। हाटी से आए श्याम लाल ने बताया कि डंगनाई पहाड़ की प्रसृद्धि रायगढ़ जिले तक है। आसपास के छाल, रायगढ़, धरमजयगढ़ तक पहाड़ पर ऐसी आस्था वाली देवी मंदिर नहीं है। वह पिछले कई वर्षों से यहां नवरात्र में आ रहे हैं।





माता के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु।
पहुंच रहे हैं। करतला विकासखंड के ग्रामीण अंचलों का आस्था का केंद्र डंगनाई पहाड़ है। के लोगों में अपार आस्था है। पथरीले रास्तों में भी दूरदराज के दर्शनार्थी डंगनाई देवी की दर्शन के लिए डंगनाई पहाड़ चढ़ते हैं। एक मान्यता के अनुसार ग्रामीणो द्वारा बताया जाता है । कभी मानसून के मौसम मे बारिश नहीं होती थी। आसपास के गांव के ग्रामीणों लोग जैसे सकदुकला, भेलवाटार, नोनबिर्रा सहित सभा कर बैठा लेकर रामायण गाने के लिए डंगनाई पहाड़ ऊपर चढ़ते और रामायण कहते थे
नवरात्रि में डंगनाई देवी के दरबार में ग्रामीण अंचलों में धूम मची हुई है। वातावरण में भारी गर्मी होने के कारण दर्शनार्थियों की संख्या भी मंदिरों में उमड़ रही है। डंगनाई पहाड़ में विराजित आदिशक्ति के दरबार में आस्था और विश्वास का संगम नजर आ रहा है। दुर्गम पहाड़ी रास्ते को पार कर भक्त आदिशक्ति के दर्शन के लिए पहाड़ की चोटी पर बने माता के मंदिर में पहुंचते हैं, जहाँ पूजा-अर्चना के साथ ही मन्नतें भी मांगी जाती हैं। दुर्गम यात्रा: यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
स्थानीय यादवा/राउत समुदाय के लोग कांवड़ में पानी लेकर डंगनाई पहाड़ के ऊपर जाते थे
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले जनपद पंचायत करतल में ग्राम पंचायत नोनबिर्रा स्थित डंगनाई पहाड़ पर माता डंगनाई देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु और स्थानीय यादवा/राउत समुदाय के लोग कांवड़ में पानी लेकर पहाड़ के ऊपर जाते थे तब जाकर पहाड़ में पहुंचने वाले दर्शनार्थियों को पानी मिल पाता था। पिछले लंबे समय तक यही सिलसिला चलता रहा और बीते वर्ष से पहाड़ के ऊपर पाइप लाइन के द्वारा नीचे खोदे गए बोर से पानी ऊपर पहाड़ में लाया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जो माता डंगनाई देवी के प्रति उनकी आस्था को दर्शाती है। के पुजारी पंचराम ने बताया कि


के पुजारी पंचराम ने बताया कि
