भोजली विसर्जन के बाद मया-दुलार की भेंट, भाईचारे और सौहार्द का संकल्प

कोरबा। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन) की ओर से 29 अगस्त को कोरबा के घंटाघर चौक में भव्य भोजली रैली का आयोजन किया जाएगा। संगठन के प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी ने 27 अगस्त को तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजन की जानकारी दी।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भोजली केवल एक रस्म नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, प्रकृति, परंपरा और आपसी भाईचारे से जुड़ी लोकसंस्कृति है। भोजली के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और एक-दूसरे के साथ मया-मितानी तथा सामाजिक सौहार्द का रिश्ता मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नई पीढ़ी अपनी लोकपरंपराओं से दूर होती जा रही है। ऐसे में भोजली जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं। इसी उद्देश्य से कोरबा में आयोजित यह कार्यक्रम पूरे छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास है।
प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन
संगठन के अनुसार यह आयोजन केवल कोरबा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक समारोह के रूप में आयोजित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अंचलों से लोक कलाकार अपनी पारंपरिक कला, लोकनृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पुरखौती धरोहर और बहुरंगी लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
घंटाघर चौक में 29 अगस्त को भव्य रैली
दिलीप मिरी ने बताया कि 29 अगस्त को घंटाघर चौक से भव्य भोजली रैली निकाली जाएगी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर भोजली का कलश रखकर रैली में शामिल होंगी। मांदर की थाप और झांझ-मंजीरे की झंकार के साथ लोकगीतों की मिठास से घंटाघर चौक गूंजेगा। भोजली विसर्जन के बाद एक-दूसरे को भोजली भेंट कर मया-दुलार, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संकल्प दोहराया जाएगा।
पत्रकारों से आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने की अपील
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने पत्रकारों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि यह आयोजन किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे कोरबा और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से जुड़ा आयोजन है। संगठन ने मीडिया से अपील की कि अपनी कलम, कैमरे और समाचारों के माध्यम से भोजली की परंपरा और आयोजन का संदेश जिले के हर घर तथा गांव-गली तक पहुंचाने में सहयोग करें।
संगठन ने आम नागरिकों से भी 29 अगस्त को घंटाघर में बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी मिट्टी, संस्कृति और परंपरा के सम्मान में एकजुट होने की अपील की है।









