छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय महाकाल सेना कोरबा के द्वारा की गयी एक पत्रकारवार्ता आयोजित
कोरबा । छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय महाकाल सेना कोरबा के द्वारा कोरबा प्रेस क्लब में एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया। जिसमे बताया गया की छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय महाकाल सेना कोरबा के द्वारा कनकी कनकेश्वर धाम में 28 जुलाई को भव्य विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, साथ ही साथ मध्यप्रदेश उज्जैन के अघोरी जो कि छत्तीसगढ़ महाकाल सेवा की प्रदेश अध्यक्ष है उनका भी इस कार्यक्रम में आगमन होना संभावित है। उनके द्वारा ग्राम कनकी के कनकेश्वर धाम में ढोल ताशे संगीत के साथ पूजा पाठ किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा की जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम सब राष्ट्रीय महाकाल सेना के सदस्य हैं।जिसकी स्थापना श्री श्री 1008 कुशाल भारती महाराज नागा साधु के द्वारा 2010 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नर सेवा, नारायण सेवा, नारी सेवा, शक्ति की सेवा, अपने धर्म सनातन की प्रचार-प्रसार और राष्ट्रीय हिन्दू राष्ट्र की घोषणा करना है।
खुशाल भारती महाराज एक बहुत ही धनवान परिवार गंगापुर राजस्थान में जन्म लेने के बाद हर बच्चों में जैसे चिकित्सक, इंजीनियर बनने की ललक होती हैं। इनकी इच्छा साधु बनने की थी। समाज से हटकर कुछ अलग करने की थी। इसी उद्देश्य के साथ इन्होंने अपने साधु परंपरा में जीवन की शुरुआत मुंबई से कर सनातन की रक्षा के लिए अग्रसर हुए। उनका उद्देश्य था की जो अपने देश, धर्म, सनातन की हर बहन बेटी, माता, बुजुर्ग, नौजवान जो धर्म संकट में फंसे हुए हैं। जिनको कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। उनको सही राह दिखाना। भारत के नौजवानों को नशा मुक्त करवाना, सही शिक्षा, संस्कार, अपनी धर्म ग्रंथ की पूरी जानकारी देना। उन्हें वेद पुराण ग्रंथ की शिक्षा देना, हमारे समाज और राष्ट्र को पूरे विश्व में स्थापित करवाना, उनका कहना था की जो बंटेगा ओ कटेगा। इसलिए हमको बटना नहीं है। चारों वर्ण को एक जुट होना है। जब हम एक होंगे तभी कुछ कर पाएंगे। हमारे देश में 88 हजार ऋषि हुए। जिनके द्वारा 4 वर्ण की स्थापना हुई। पहला ब्राह्मण, दूसरा क्षत्रीय, तीसरा वैश्य और 4था शूद्र। ये सब हमारे ऋषि मुनि की वंश है जिसको इंसानों ने अपने स्वार्थ के लिए उच्च स्तर ओर नीचा स्तर बना दिया। दअरसल सनातन इससे परे है। साधु और सनातन की संरचना हमारे देव आदि योगी श्री शिव ने की। शिव ने सिर्फ एक हि जाति बनाई मानव। तो हम सब की जाति मानव है एसटी, एससी, ओबीसी, या जनरल नहीं हैं। हम सनातनी है। जब नर, नारी, का जन्म नहीं हुआ था तब सिर्फ मानव की उत्पत्ति हुई जो सनातन के नाम से प्रसिद्ध हुआ। हमारा मुख्य उद्देश्य हमारे घर को सुरक्षित करना अपने धर्म की रक्षा करना। पुरुषों के लिए महाकाल सेना और स्त्री जाती के लिए काली सेना की संरचना की गई है। वामपंथी को मौका दिया गया है अपने घर वापस आ जाओ या ये देश छोड़ कर बाहर चले जाओ। आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना। ओर हमारे देश की रक्षा करना ही हमारा मुख्य काम है। हमें देश के हित में जो भी करना पडेगा हम करेंगे। यह हमारे श्री श्री कुशाल भारती जी दिगम्बर महाराज जी के वचन है।
सनातन धर्म की उत्पति सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी हुई है। जो सबसे पुरानी धर्म है। जिसे हिन्दू धर्म के नाम से भी जाना जाता है। जो लगभग 3300 ईसा पूर्व 1300 ईसा पूर्व तक विद्यमान थी। कुछ मान्यता पूर्वक यह धर्म 12000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। और कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार यह धर्म 90000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है। सनातन का अर्थ शास्वत या सदा बने रहने वाला अर्थात् जिसका ना आदि है न ही अंत है। ॐ सनातन का प्रतीक चिन्ह हैं।
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KORBA:-छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय महाकाल सेना कोरबा के द्वारा की गयी एक पत्रकारवार्ता आयोजित…कनकी कनकेश्वर धाम में 28 जुलाई को भव्य विशाल भंडारे का आयोजन….
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