कोर्ट ने 4-4 साल के आश्रम गांव पर लगाया 50-50 हजार अर्थदंड की सजा का आरोप, कोर्ट ने सुनाया फैसला
कोरबा। कोरबा जिले में कुवैती दवा की बिक्री करते समय दो प्लॉटों का दोष सिद्ध पाया गया, जो एसश्रम और अर्थदंड से कोर्ट द्वारा बेचे गए थे। विशेष न्यायाधीश ने उनके कार्य को सहानुभूति के रूप में नहीं माना है।
विशेष लोक अभियोजक टीकम साव ने बताया कि घटना दिनांक 25.09.2021 को थाना कुसमुंडा के सहायक उपनिरीक्षक रफीक खान को प्रशिक्षण के दौरान सूचना मिली थी कि मोटर सायकल का चालक नशीला मनोत्तेजक कैप्सूल विकास नगर कैंटीन के पास बिक्री कर रहा है। उक्त सूचना के बाद कंपनी की मोटर सायकल एवं स्प्लेंडर मोटर सायकल के चालक को उनके मोटर सायकल के पास से घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। उनकी शर्ट की जेब में 4 स्ट्रिप और 2 स्ट्रिप अलग-अलग खुलीं, कुल 6 स्ट्रिप में कुल 48 नग पायवन स्पास कैप्सूल बरामद हुआ। दावा किया गया कि बायोडाटा के पास से ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड घटक युक्त पाइवन स्पा प्लस कैप्सूल 48 एनजी एवं 232 एनजी को बिना वैध अनुज्ञप्ति के विक्रय करने के प्रस्तावों से अपने व्यवसाय में रखा गया। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 बी के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई के बाद प्रकरण कोर्ट में पेश किया गया।
विशेष न्यायाधीश (डीएसी पी.एस. अधिनियम) श्रीमती गरिमा शर्मा ने दोनों पक्षों के दिवालियापन को सुना। दोष सिद्ध होने के बाद विचार किया गया कि दोनों ने 4-4 साल के आश्रम में 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड से भुगतान किया है। राशि का भुगतान न करने पर 6-6 माह का अतिरिक्त सश्रम लायंस कास्ट किया जाएगा।
- समाज पर कुप्रभाव, सहानुभूति को अनुचित माना न्यायाधीश ने
अभियोजन के अधिवक्ता टीकम साव ने न्यायधीश से कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर है। वर्तमान में नशीली दवाओं के विक्रय का अपराध क्षेत्र में बढ़ गया है तथा इसकी चपेट में कम आयु के बच्चे भी आ रहे हैं। अतः अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्तगण को कड़ी सजा दी जाये। अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता ने व्यक्त किया कि अभियुक्तगण के प्रति उदारता बरती जाये। दोनों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि वर्तमान परिवेश में मादक एवं मनोत्तेजक पदार्थ के अवैध विक्रय, सेवन एवं परिवहन के अपराध में वृद्धि हुई है। यह एक सामाजिक बुराई है, जिसका कुप्रभाव समाज में वृहद रूप से विशेष कर युवा वर्ग पर पड़ रहा है। ऐसे प्रकरण में सहानुभूति अपनाया जाना उचित नहीं है। अतः प्रकरण की परिस्थिति एवं अभियुक्तगण से जप्तशुदा मात्रा को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्तगण को दंडित किया जाता है।


















