
मानिकपुर में फ्लाई ऐश डंपिंग पर पूर्व मंत्री जयसिंह का सवाल
0 बोले- एसईसीएल की रिपोर्ट और मौके की स्थिति में विरोधाभास
0 केंद्रीय कोयला मंत्रालय को दी गई जानकारी पर उठाए सवाल, स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच की मांग
कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट खदान में फ्लाई ऐश डंपिंग को लेकर एसईसीएल प्रबंधन द्वारा केंद्रीय कोयला मंत्रालय को दी गई जानकारी पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसईसीएल की रिपोर्ट और मौके से सामने आए तथ्यों में विरोधाभास नजर आ रहा है। पूर्व मंत्री ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
पूर्व मंत्री के मुताबिक उन्होंने अप्रैल 2026 में केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र भेजकर मानिकपुर ओपन कास्ट खदान में फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला उठाया था। इसके जवाब में मंत्रालय को एसईसीएल प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई कि मानिकपुर की बंद पड़ी खदान में 5 नवंबर 2025 से फ्लाई ऐश डंपिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जून 2026 में मौके के प्रत्यक्ष फोटोग्राफ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जब मामला दोबारा उठाया गया तो वहां डंपिंग जारी रहने की स्थिति सामने आने का दावा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नवंबर 2025 में डंपिंग बंद कर दी गई थी तो जून 2026 में मौके पर डंपिंग कैसे जारी थी? उन्होंने यह भी सवाल किया कि स्थानीय प्रबंधन, बिलासपुर मुख्यालय और केंद्रीय मंत्रालय को इस मामले में किस तरह की जानकारी भेज रहा है। पूर्व मंत्री ने कहा कि यह किसी अधिकारी विशेष को बदनाम करने का विषय नहीं है, बल्कि एसईसीएल की संस्थागत जवाबदेही और विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। उन्होंने मांग की कि यह सार्वजनिक किया जाए कि मंत्रालय को जानकारी किस स्तर से और किन परिस्थितियों में भेजी गई थी।
भू-विस्थापितों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया
पूर्व मंत्री ने मानिकपुर सहित कोरबा क्षेत्र के वर्षों से लंबित भू-विस्थापितों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एसईसीएल दशकों से कोरबा की धरती से कोयला निकाल रहा है और विकास का विरोध नहीं है, लेकिन जिन परिवारों की जमीन और मकान विकास के लिए लिए गए, उन्हें अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार तथा छूटे हुए मकानों और जमीन के सर्वे जैसे कई मामले अब भी लंबित हैं। उन्होंने इन मामलों का समयबद्ध निराकरण करने के साथ फ्लाई ऐश डंपिंग प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।








