KORBA:-: सेवा संकल्प अभियान पर उठे सवाल, दिव्यांग को ट्राइसाइकिल की चाबी देकर वापस लेने का आरोप
कोरबा। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ पर ही अब सवाल उठने लगे हैं। ग्राम देवरमाल निवासी अस्थि बाधित दिव्यांग दुर्गा प्रसाद का आरोप है कि कार्यक्रम में उसे मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की चाबी तो सौंपी गई, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उससे चाबी वापस ले ली गई। बाद में उसे यह कहकर लाभ देने से इनकार कर दिया गया कि उसे पूर्व में योजना का लाभ मिल चुका है। वही दुर्गा प्रसाद की आवश्यकता को देखते हुए समाज कल्याण विभाग को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद विभाग द्वारा उसे मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान किए जाने और इससे उसकी जिंदगी आसान होने का दावा किया गया। हालांकि, दुर्गा प्रसाद के मुताबिक कार्यक्रम के बाद उससे ट्राइसाइकिल की चाबी वापस ले ली गई। उसका कहना है कि जब उसे पूर्व में ही योजना का लाभ मिल चुका था, तो फिर उसे कार्यक्रम में बुलाकर दोबारा लाभ दिए जाने की प्रक्रिया क्यों की गई? हितग्राही ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर योजना की कार्यप्रणाली और उसकी नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित का कहना है कि यदि विभाग के रिकॉर्ड में उसे पहले ही मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल या संबंधित योजना का लाभ मिल चुका था, तो उसकी समस्या सुनकर दोबारा लाभ देने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जानी चाहिए थी। उसके अनुसार, सार्वजनिक रूप से चाबी सौंपे जाने के बाद उसे वापस लेना उसके लिए असहज और निराशाजनक स्थिति रही। वही प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने के बाद दिव्यांग जनों के आत्मनिर्भर होने, आवागमन सुगम होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करने की बात कही गई है। वहीं, हितग्राही का दावा इस सरकारी तस्वीर से बिल्कुल अलग है। वही मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। ऐसे में यदि किसी पात्र हितग्राही को लाभ देने से पहले विभागीय रिकॉर्ड की जांच नहीं हुई और कार्यक्रम के बाद लाभ वापस लिया गया, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। अब सवाल यह है कि दुर्गा प्रसाद को ट्राइसाइकिल वास्तव में प्रदान की गई थी या केवल कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक रूप से चाबी सौंपी गई थी? यदि वह पहले ही योजना का लाभ ले चुका था तो उसे दोबारा लाभार्थी के रूप में कार्यक्रम में क्यों शामिल किया गया? इन सवालों पर समाज कल्याण विभाग का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
कोरबा ब्लॉक के ग्राम पंचायत देवरमाल निवासी अस्थि बाधित दिव्यांग दुर्गा प्रसाद के आरोप पर जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि अस्थि बाधित दिव्यांग दुर्गा प्रसाद का हितग्राहियों की सूची में नाम नहीं था। जबकि पूर्व में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लाभार्थी है वहीं उन्होंने कहा मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल रिपेयरिंग के लिए बुलवाने पर दुर्गा प्रसाद के द्वारा उपस्थित नहीं हुए। सीईओ श्री जैन ने आगे कहा कि जिला कलेक्टर के संज्ञान में आने पर उनके द्वारा सीएसआर मद से उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल देने का आश्वासन दिया गया है।









