डंगनाई मंदिर जाने के लिए सीढ़ी बनाई गई है, लेकिन अभी भी यह अधूरी है। 46 लाख रुपए की स्वीकृति के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। डंगनाई देवी की आस्था आसपास के ग्रामीण अंचलों में बहुत है, और दूर-दराज से लोग दर्शन करने आते हैं। डंगनाई देवी के दरबार तक पानी को पहाड़ की चोटी तक ले जाने के लिए, :- यादव (राउत) समुदाय द्वारा कवर शिखा से पहाड़ के ऊपर पानी लेजया जाता था और इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।
स्वप्न का रहस्य: डंगनाई देवी ने एक ग्रामीण जब वहां आराम कर रहा था, तब उसे सपने में मां काली ने स्वयं अपनी स्थिति बताई थी। डंगनाई देवी पहाड़ की चोटी माता की मूर्ति है



मंदिर
डंगनाई देवी के दरबार में 9 दिन तक आराधना का दौर चल रहा है। चैत्र नवरात्र के पर्व पर ग्रामीण अंचलों में धूम मची हुई है। वातावरण में गर्मी होने के कारण दर्शनार्थियों की संख्या भी मंदिरों में उमड़ रही है। पहाड़ों में विराजित आदिशक्ति डंगनाई देवी माता के दरबार में आस्था और विश्वास का संगम नजर आ रहा है। पहाड़ रास्ते को पार कर आदिशक्ति के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो माता के प्रति अटूट आस्था और भक्ति को दर्शाती है। वर्तमान में चैत्र नवरात्रि (मार्च 2026) के दौरान, विशेष रूप से डंगनाई देवी मंदिर तक श्रद्धालु पहाड़ की चढ़ाई करके पहुंच रहे हैं।
दुर्गम पहाड़ी और अधूरी बनी है सीढ़ी



नोनबिर्रा ग्राम पंचायत क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों का आस्था का केंद्र डंगनाई पहाड़ है, जहां सकदुकला, भेलवाटार, नोनबिर्रा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोगों की असीम आस्था है। जिले के ग्रामीण अंचलों के पहाड़ी क्षेत्रों में आस्था के ऐसे दीप जल रहे हैं जिसके पीछे ग्रामीणों की अपनी अपनी मान्यताएं हैं। ऐसी ही मान्यता वाले एक डंगनाई पहाड़ है। नोनबिर्रा मार्ग में डंगनाई पहाड़ पर विराजित मां डंगनाई देवी की आसपास क्षेत्र पहुंच रहे हैं। करतला विकासखंड के नोनबिर्रा ग्राम पंचायत के ग्रामीण अंचलों से आस्था का केंद्र डंगनाई पहाड़ है। जिसके प्रति सकदुकला, भेलवाटार, नोनबिर्रा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोगों की असीम आस्था है। चैत्र की नवरात्रि में डंगनाई देवी के दरबार में 9 दिन तक आराधना का दौर चलता है। ग्रामीणों
डंगनाई मंदिर जाने की सीढ़ी।
माता के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु।
के अनुसार पहाड़ के एक स्थल पर एक छोटी प्रतिमा देवी की नजर आयी थी। तब से उनके पूर्वजों के समय से इसकी आस्था व आराधना की जा रही है। डंगनाई देवी दरबार
दुर्गम पहाड़ी और अधूरी बनी है सीढ़ी
डंगनाई देवी पहाड़ के दुर्गम पहाड़ी रास्ते को सुगम बनाने के लिए 46 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे इस राशि से मंदिर स्थल तक सीढ़ी बनाने का काम करना था जो आधा अधूरा बना हुआ है। डंगनाई देवी दर्शन के लिए धरमजयगढ़, हाटी और खरसिया से दर्शनार्थी यहां पहुंचते हैं। हाटी से आए श्याम लाल ने बताया कि डंगनाई पहाड़ की प्रसृद्धि रायगढ़ जिले तक है। आसपास के छाल, रायगढ़, धरमजयगढ़ तक पहाड़ पर ऐसी देवी मंदिर और आस्था वाली देवी मंदिर नहीं है। वह पिछले 4 वर्षों से यहां नवरात्र में आ रहे हैं।
के पुजारी पंचराम ने बताया कि