कांग्रेस जिला अध्यक्ष नत्थू लाल यादव ने बालको चिकित्सालय द्वारा इलाज में बरती जा रही लापरवाहियों से मरीजों की जिन्दगी से हो रहे खिलवाड़ का शिकायती पत्र लिखा सीएमएचओ को।


कोरबा । कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष नतथू लाल यादव ने बालको चिकित्सालय में इलाज के दौरान लापरवाही बरने की शिकायत कोरबा जिला अस्पताल के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखते हुए प्रतिलिपि स्वास्थ्य संचालक दग शासन एवं कोरबा कलेक्टर को प्रेषित किया है। यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि कोरबा निवासी राजेन्द्र पटेरिया जिनकी उम्र लगभग 57 वर्ष है उपचार बालको के विभागीय चिकित्सालय में विगत लगभग दो वर्षों से चिकित्सक डाॅ. महेश बाबू की देख रेख में चल रहा था। दिनांक 12 जुलाई, 2025 को सुबह बेहतर नहीं महसूस होने पर उसे बालको चिकित्सालय पहुंचाया गया और डाॅ. महेश बाबू की सलाह पर अस्पताल में भर्ती किया गया। तत्कालिक तौर पर उसे आई.सी.यू. में रखा गया जहां डाॅ. महेश बाबू ने उपचार आरंभ किया। जांच के बाद डाॅ. बाबू ने उनके परिजनों को बताया कि मरीज को दो यूनिट ब्लड देने की आवश्यकता है। परिजनों ने डाॅ. से निवेदन किया कि इनको अलग कक्ष में रखा जाए क्योंकि यहां आई.सी.यू. में गंभीर मरीजों का आना-जाना लगा रहता है जिससे इन्हे घबराहट होती है। डाॅ. बाबू ने सहमति प्रदान करते हुए संबंधित स्टाॅफ को आवश्यक निर्देश देने के साथ ही ब्लड की मैचिंग आदि की प्रक्रिया आरंभ करवा दिया।
जिला अध्यक्ष ने पत्र में आगे लिखा है कि आई.सी.यू. में रहने के वक्त वहां न तो ए.सी. चल रहा था और न ही कोई पंखा चल रहा था। परिजनों ने स्टाॅफ से निवेदन किया कि मरीज को वहां घुटन महसूस हो रही है अतएव अलग कक्ष में उसे शिफ्ट करवा दिया जाए परन्तु किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। ब्लड की मैचिंग आदि प्रक्रिया में शाम हो गई। शाम 8.00 बजे नर्स ने मरीज को कुछ कागजात देते हुए कहा कि आप इन पर हस्ताक्षर कर दीजिए, आपको ब्लड चढ़ाया जाएगा। उस समय तक मरीज को बेचैनी महसूस होने लगी थी और वह पसीने से सराबोर हो चुका था। उसने हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया और कहा कि यहां ब्लड नहीं लगवाऊंगा, यहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता है और उसे घबराहट होती है। पहले उसे अलग कक्ष में शिफ्ट किया जाए फिर उसके बाद ब्लड चढ़ाया जाए।
इसके बाद नर्स ने डाॅक्टर महेश बाबू के पास जाकर बोली कि मरीज ने कागजातों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। कुछ देर बाद आॅन ड्यूटी डाॅ. साजिया ने आकर अचानक बोला कि डाॅ. महेश बाबू ने आपको डिस्चार्ज करने के लिए कह दिया है, इसलिए आपको यहां से डिस्चार्ज किया जाता है। मरीज व उनके साथ गए लोगों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने जब कहा कि कोई बात नहीं आप डिस्चार्ज कर दीजिए लेकिन यही काम आप दोपहर में भी कर सकते थे उस समय आपने ऐसा क्यों नहीं किया और लगभग 8-10 घंटे यहां रखने के बाद ऐसा कर रहे हैं तो डाॅ. साजिया ने कहा कि मुझे नहीं मालूम ऐसा डाॅ. महेश बाबू ने कहा है। इसी बीच मरीज के साथ गए हुए परिजन ने कोरबा के निजी चिकित्सालय में डाॅ. विशाल उपाध्याय जी से बात कर मरीज की पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए ब्लड चढ़वाने की आवश्यकता बताई तो उन्होंने तत्काल व्यवस्था करवाते हुए बताया कि आप मरीज को लेकर आ जाईए यहां सब व्यवस्था कर दी गई है। अंततः तत्काल उसेे निजी चिकित्सालय ले जाया गया जहां ब्लड चढ़वाने का कार्य तत्काल आरंभ किया गया और अभी वह काफी बेहतर महसूस कर रहा है।
एक यही प्रकरण नहीं बालको अस्पताल में मरीजों के इलाज में कोताही बरते जाने की कई और शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अतएव इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह है कि अस्पताल संचालन में नर्सिंग होम संचालन एक्ट समेत अन्य निर्धारित नियमों का पालन कराने का कष्ट करें साथ ही बालको चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाहियों की वजह से मरीजों की जिन्दगी के साथ हो रहे खिलवाड़ के कृत्य को गंभीरता से लिया जाए और इस संबंध में सम्पूर्ण प्रकरण की जांच कर दोषी पाए जाने वाले डाॅक्टर अथवा स्टाॅफ पर ठोस कार्रवाई करें ताकि भविष्य में कभी भी किसी मरीज की जिन्दगी के साथ बालको चिकित्सालय में खिलवाड़ न हो सके।


















